Sunday, December 5, 2021

LAKEEREN BHAAGYA KI ( JIVAN )

 

           लकीरें भाग्य की 

 

लकीरें भाग्य की हैं चमकतीं , 

लकीरें भाग्य की हैं दमकतीं ,

मगर उनसे ज्यादा चमकती हैं ,

मगर उनसे ज्यादा दमकती हैं ,

मेहनत की लकीरें ,परिश्रम की लकीरें | 


तो सोच ले ऐ - मानव ,तुझे क्या चाहिए ? 

तुझे कैसे चाहिए ? मेहनत से या भाग्य से ? 

जब मेहनत होगी ,जब परिश्रम होगा ,

तभी तो भाग्य देगा ,तभी किस्मत जागेगी | 


नहीं खाली बैठ ,करे जा तू मेहनत ,

नहीं खाली सोच ,करे जा तू परिश्रम ,

बदल दे अपने हाथों की लकीरें ,

बदल दे तू अपनी तकदीरें | 


खुशहाली आएगी ,ये काली सी ऋतु जाएगी ,

मगर अब आगे तू ,

मेहनत से ना रुकना ,परिश्रम से ना झुकना | 


चलना प्रकृति के बनाए कायदों पर ,

निभाना प्रकृति के बनाए नियमों को ,

ये जीवन तभी बनेगा सुंदर ,

ये जीवन तभी बनेगा मजबूत | 


वरना ये काली सी ऋतु ,हर लेगी जीवन को ,

मिटा देगी इंसान के नामों - निशान को ,

बचा ले अपने अस्तित्व को ,

मिटा दे इस काली सी ऋतु को ,

बन दोस्त प्रकृति का ,कर मेहनत ,

कर परिश्रम और सजा अपना आशियाना |

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