Tuesday, March 15, 2022

EK SAPANA ( KSHANIKA )

 

               एक  सपना 

 

सुबह की मीठी नींद में देखा ,

हमने सुंदर सपना ,

घूम रहे हैं हम वहाँ दोस्तों ,

बचपन का घर था जो अपना | 

 

छोटी बगिया खिली वहाँ पर ,

तितलियाँ उड़ रहीं थीं फर -फर ,

प्यार बसा था उस बगिया में ,

तितली का खेल था अपना | 

 

बचपन के घर में हम तो दोस्तों ,

रहे खेलते घंटों ,

यादें जहाँ बसी थीं अपनी ,

जीवन बीता जहाँ अपना | 


तभी आए दो साये  वहाँ पर ,

प्यार से हाथ को थामा ,

गौर से उनको देखा जब तो ,

वो थे साये माता -पिता के अपने | 


नींद खुली जब चौंक के दोस्तों ,

पाया खुद को अकेला ,

सपने के ध्यान में हम डूबे ,

और बोल उठे ,"ये तो था एक सपना " | 


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