Thursday, March 17, 2022

KHILAA AMBER ( KSHANIKA )

 

                 खिला अंबर

 

नीले -नीले अंबर में ,बदरा जब छा जाएँ ,

बूँदों की रिमझिम सी ,बारिश जब बरसाए ,

सूरज की किरनों का ,जाल जब बिछ जाए ,

अंबर भी तब तो ,सतरंगी हो जाए | 

 

ऐसा लगता है तब ,अपनी धरा ने ,

ओढ़ी है देखो तो ,सतरंगी चूनर ,

चूनर को ओढ़ के तो ,धरा भी इतराए ,

उसे ऐसे देख के ,अंबर भी मुस्काए | 

 

मौसम तब भीगा सा ,रंगों में डूबा सा ,

सभी कुछ तो ,धरे और अंबर के रंगों में ,

मिल रंगीन हो गया सा ,खिल गया सा ,

मिट्टी भी अब तो ,सौंधी सी खुश्बु लुटाए | 

 

इस सतरंगी मौसम में ,हम भी तो रंग गए ,

उसी में रंग के हम भी ,सतरंगी हो गए ,

मिट्टी की सौंधी सी ,खुश्बु में डूब के ,

हम भी तो अब ,खुश्बुदार हो गए | 

 

 

No comments:

Post a Comment