Sunday, March 27, 2022

GUNGUNI ( PREM )

 

                         गुनगुनी 

 

कंदराओं में फिरूं मैं ,घूमती सी अनमनी , 

जिंदगी का साज छेड़ूँ ,घूमती सी अनमनी | 


दीये की लौ सी मैं लहकूँ ,दूँ प्रकाश सभी को ,

सागर की लहरों सी चहकूँ ,घूमती सी अनमनी | 


कलियों का राज है चमन में ,रंगों में खिलता है चमन ,

मैं तो फूलों जैसी महकूँ ,घूमती सी अनमनी | 


नदियों की धारा है बहती ,पर्वतों से नीचे की ओर ,

मैं सदा नीचे ही रहती ,घूमती सी अनमनी | 


जिंदगी सबकी चहकती ,इस जहां की ताल पर ,

मेरे दिल की धड़कन तो चलती ,घूमती सी अनमनी | 


आज इस संसार में ,तू है मेरा हमसफ़र ,

मैं भी तेरी हमसफ़र हूँ ,डूबती सी चुनमुनी | 


प्यार हम दोनों का जानम ,है अमर संसार में ,

तू भी ,मैं भी ,दोनों ही ,हो गए हैं गुनगुनी | 


बदरा जब बरसे हैं जानम ,दोनों भीगे हैं खूब ,

बदरा का था पानी कम ,प्यार की बरखा घनी | 


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