Saturday, November 19, 2022

ANUBHAV ( JIVAN )

 

                         अनुभव 


पल -पल समय बीतता जाता ,

पीछे छोड़ता जाता निशान ,

ऐसे ही पल -पल जीवन ,

मानो वह उड़ता जाता ,

जो निशान छूटते पीछे ,

वह ही तो है अनुभव बंधु | 


अनुभव ना तो हाट बिकाय ,

ना बिकता बाजार में ,

ना पैसों से मिलता बंधु ,

ना रुपयों की खान से ,

पल -पल जीवन खर्च करो ,

तब मिलता अनुभव बंधु | 


अपनी उम्र बिताय के ,

जो अनुभव मिल जाय ,

वही तो असली अनुभव है ,

जो सारे राज दिखाय ,

मगर सच्चा अनुभव तो ,

अपनों को असली राह दिखाय | 


जीवन भर की यह कमाई ,

खान बड़ी बन जाय ,

पग -पग पर जो चलें हम  ,

उसकी राह बताय ,

पकड़े जो उस राह को ,

लाभ वही तो पाय | 


बीत जाय सारा जीवन ,

तब अनुभव की खान भरे ,

रीत जाय सारा जीवन ,

तब अनुभव की खान भरे ,

जो दूजे के अनुभव से लाभ उठाय ,

उसे लाभ सारा का सारा ,

बिन मोल मिल जाय |  


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