Sunday, November 6, 2022

MUSKAAN LIE CHANDA ( CHANDRMA )

 

                           मुस्कान लिए चंदा 


नींद से आँखें खुलने पर ,

देखा चंदा खड़ा है सामने ,

लिए मुस्कान चेहरे पर ,

हो गई मैं हैरान देख सामने | 


अरे ! सखा तुम कब आए ? 

सखि ,दिन बीतते जाते ,यूँ ही व्यस्तता में ,

आज समय मिल गया ,तो सोचा ,

दूँ सरप्राइज़ ,हो खड़ा सामने | 


अच्छा किया सखा ये तुमने ,

मैं भी खुश हूँ तुम्हें देख कर ,

मैं लाती हूँ चाय बनाकर ,

बातें करेंगे दोनों बैठ सामने | 


उठी मैं लाई चाय बनाकर ,

बैठ गए हम दोनों बंधु ,

चाय के सिप कम ,बातें ज्यादा ,

जब तक कोई ना आया रोकने | 


हम दोनों जब भी मिलते हैं ,

ऐसे ही बातें करते हैं ,

अपने दिल का हाल बताते ,

फिर लगते हैं दूसरे का जानने | 

 

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