Friday, March 3, 2023

CHAMAK CHAANDANI KI ( CHANDRAMA )

 

             चमक चाँदनी की 


रात झाँका जो चाँद ,मेरी खिड़की से ,

भेजा अपनी चाँदनी को ,अंदर मेरे पास ,

चमक उठा मेरा कमरा ,चमक से चाँदनी की | 


चाँदनी ने जगमगाया ,मेरा कमरा ,

हर चीज रोशन हुई ,कमरे की ,

फर्श तक जगमगा उठा ,चमक से चाँदनी की | 


चाँद तू भी आ जाता ,अपनी के संग ,

ख़ुशी तो मेरी तब ,दोबाला हो जाती ,

अभी तो है अकेली मेरे पास ,चमक चाँदनी की | 


आ जाती मेरे लबों पे ,मुस्कुराहट भी ,

तुझे जो पाती ,अपने पास मेरे चाँद ,

चमक आ जाती मेरी आँखों में ,चमक से चाँदनी की | 


तेरी दुनिया तो है ,बड़ी, बहुत बड़ी चंदा ,

मेरी दुनिया में तो तू है ,नन्हें तारे हैं ,

और बस है तो ये ,चमक चाँदनी की | 

 

 

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