Sunday, June 4, 2023

JAL HI JAL ( JALAD AA )

 

                      जल ही जल 


बदरा रे ,तू कहाँ से लाया इतना जल ? 

सारी धरती तूने  कर दी जल ही जल | 


कोई समंदर किया क्या रीता ? 

बना क्या तू ,धरा का मीता ? 

जो तूने किया ,धरा को जल ही जल | 


कैसे इतना किया तूने भार वहन ? 

कैसे उड़ा तू ले के ,जल को बिना वाहन ? 

कैसे किया तूने ,सारी धरा को जल ही जल ? 


तू तो इतना कोमल बदरा ,कैसे जल को उठाए तू ? 

तू तो श्यामल रंग बदरा ,दामिनी को भी भिगाए तू ,

दामिनी के होते तूने ,बदरा  कैसे उठाया जल ? 


धरा को सारा जल देकर ,कहाँ पे उड़ जाता है तू ? 

नहीं दिखाई देता हमको ,कहाँ पे छिप जाता है तू ? 

तू तो बदरा देता दिखाई तभी ,जब तू लाता है जल | 


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