मुक्ति
प्रेम साधना कर लो बंधु ,जग के पालनहार से ,
ये साधना की जो तुमने , तो भक्ति है ,
यदि समझे साधना को , तो शक्ति है ,
और यदि पा गए उसे , तो मुक्ति है ||
भक्ति ही तो तुम्हारी शक्ति है ,
इसी शक्ति से ही तो , तुम बलशाली बनोगे ,
मुक्ति पा कर ही तो तुम ,
कर लोगे इस भवसागर को पार दोस्तों ||
जिंदगी के इस रूप को , अपना लो ,
जीवन सुंदर और सबल , बना लो ,
तभी तो तुम उस , रचनाकार की ,
छत्र छाया में रहकर उसका , प्यार पा लो ||