Saturday, January 3, 2026

PYAAS ( RATNAAKAR )

         

                             प्यास 

 

आज तो बदरा बरसे , पूरी रात सखि ,

रत्नाकर की प्यास बुझाई  ,

कहाँ से लाए इतना जल   ?

जिससे भर पाया पूरा रत्नाकर   || 

 

लहरें रत्नाकर की , खेल रही होंगी  ,

उछल - उछल कर खेल रही होंगी  ,

सबको ही पास बुला रही होंगी  ,

मुस्कानें सब में बाँट रही होंगी   || 

 

बदरा से इतना जल लेकर , 

रत्नाकर तुम आओ मेरे पास  ,

हम दोनों साथ मिल कर बैठेंगे  ,

मिल - जुल कर दिल की बात करेंगे   || 

 

तुम अपनी सुनाना और मेरी सुनना  ,

आपस में एक - दूजे की  ,

जिंदगी के बारे में जानेंगे  ,

और दोस्ती में डूब जाएँगे   || 

 

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