Monday, January 5, 2026

CHAMAKATII DAAMINII ( JALAD AA )

 

                            चमकती दामिनी 

 

सारी रात बदरी बरसती रही सखि री ,

साथ में दामिनी चमकती , कड़कती रही सखि री ,

पवन ने भी अपनी दौड़ लगा दी सखि री  ,

रात भर द्वार खड़कते रहे सखि री   || 

 

रात में हर शोर ने ,जगाया हमें कई बार  ,

नींद की रानी ने , वापस सुलाया हमें हर बार  ,

बदरी  भी रात के अँधियारे में   ,

पवन के संग , डोलती रही सखि री   || 

 

दामिनी की चमक ने दिखाया  ,

अँधेरे में भी रस्ता बदरी को  ,

बदरी ने भी हाथ थाम कर दामिनी का  ,

मनोरंजन कराया , धरा को सखि री   || 

 

चलो दोस्तों हम भी  , बदरी का हाथ थामें  ,

गगना के अँगना में खेलें  ,

दामिनी तुम दिखाओगी ना , रास्ता हमें भी  ? 

रात के अँधियारे में धरा के  , अनजान रास्ते सखि री   ||   

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