चमकती दामिनी
सारी रात बदरी बरसती रही सखि री ,
साथ में दामिनी चमकती , कड़कती रही सखि री ,
पवन ने भी अपनी दौड़ लगा दी सखि री ,
रात भर द्वार खड़कते रहे सखि री ||
रात में हर शोर ने ,जगाया हमें कई बार ,
नींद की रानी ने , वापस सुलाया हमें हर बार ,
बदरी भी रात के अँधियारे में ,
पवन के संग , डोलती रही सखि री ||
दामिनी की चमक ने दिखाया ,
अँधेरे में भी रस्ता बदरी को ,
बदरी ने भी हाथ थाम कर दामिनी का ,
मनोरंजन कराया , धरा को सखि री ||
चलो दोस्तों हम भी , बदरी का हाथ थामें ,
गगना के अँगना में खेलें ,
दामिनी तुम दिखाओगी ना , रास्ता हमें भी ?
रात के अँधियारे में धरा के , अनजान रास्ते सखि री ||
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