चमकार
चाँद का घर है , बादलों के पार दोस्तों ,
चलो उड़ चलें हम भी , बादलों के पार दोस्तों ,
लाओ कहीं से दो पंख , चाहे हों उधार दोस्तों ||
पंख लगा कर हम उड़ जाएँ , ऊँचे गगना में ,
चाँद पर पहुँच जाएँ , हम गगना के अँगना में ,
पहुँच कर चाँद के घर , कर लें उससे आँखें चार दोस्तों ||
चंदनिया भी मिलेगी वहाँ , जो मुस्कान है चंदा की ,
उससे हम करेंगे दोस्ती , चंदा के उस घर में ,
चमकाएँगे अपना जीवन , लेकर चंदनिया की चमकार दोस्तों ||
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