सच - झूठ
हम सच बोलते रहे तुम से ,
तुम झूठ बोलते रहे हम से ,
सच और झूठ की यही राहें , मिलती रहीं आपस में ,
तो बोलो तुम , ऐसा क्यों हुआ ??
ये सच और झूठ की राहें , क्यों आपस में टकराईं ?
क्यों ये राहें , अलग नहीं हुईं ?
तो बोलो तुम , ऐसा क्यों हुआ ??
अगर ये राहें अलग हो गईं ,
तो जीवन हमारा और तुम्हारा ,
सुंदर हो जाएगा दोस्तों ,
कीमत कुछ शब्दों की तो होनी चाहिए ,
मान अपने शब्दों का तो होना चाहिए ,
सच का सम्मान होना चाहिए दोस्तों ||
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