श्रम - बिंदु
श्रम - बिंदु --- मेहनत का पसीना ,
आज पवन मेरे घर आई सखि ,
मेरे श्रम - बिंदुओं को , वह ले उड़ी सखि ,
प्यार से मेरे चेहरे को , सहला गई सखि ,
उड़ा - उड़ा कर मेरे , गेसू बिखरा गई सखि ||
गगना में उड़ते बदरा को , दूर उड़ा गई सखि ,
रवि किरणों को भी , हर ओर फैला गई सखि ,
धरा पर रश्मियाँ , बिखरा गई सखि ||
राहों के अँधियारों को , चमका गई सखि ,
हमारी साँसों को , महका गई सखि ,
ऐसी हमारी सहेली है , ये पवन है सखि ||
No comments:
Post a Comment