Thursday, January 1, 2026

SHRUM - BINDU ( PAWAN )

 

                        श्रम - बिंदु 

 

श्रम - बिंदु  ---  मेहनत का पसीना ,

 

आज पवन मेरे घर आई सखि  ,

मेरे श्रम - बिंदुओं को , वह ले उड़ी सखि ,

प्यार से मेरे चेहरे को , सहला गई सखि , 

उड़ा - उड़ा कर मेरे  , गेसू बिखरा गई सखि   || 

 

गगना में उड़ते बदरा को  , दूर उड़ा गई सखि  ,

रवि किरणों को भी  , हर ओर फैला गई सखि  ,

धरा पर रश्मियाँ  , बिखरा गई सखि   || 

 

राहों के अँधियारों को  ,  चमका गई सखि  ,

हमारी साँसों को  , महका गई सखि  ,

ऐसी हमारी सहेली है  ,  ये पवन है सखि   || 

 

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