Thursday, May 5, 2022

JIVAN NAIYAA ( RATNAAKAR )

 

            जीवन नैया 

 

बीत गए हैं दिन बहुतेरे ,

आ नहीं पाए पास तुम्हारे ,

रत्नाकर तुम तो हो दोस्त ,

हम भी तो हैं दोस्त तुम्हारे | 

 

तुम तो हमको रोज बुलाते ,

पर हम कैसे आएँ पास तुम्हारे ? 

राह में खड़ी हैं बहुत सी बाधा ,

नहीं दूर हम उन्हें कर पाते | 


कमी समय की भी रत्नाकर ,

व्यस्त सदा रहते हैं हम ,

कम होगी जब अपनी व्यस्तता ,

थोड़ा समय निकालेंगे फिर हम | 


मिल कर बात करेंगे फिर हम ,

वक्त कटेगा पंख लगा कर ,

जीवन नैया ऐसे ही तब ,

पार लगेगी तैर - तैर कर | 


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