Wednesday, May 4, 2022

BAANHON ME ( CHANDRAMA )

 

             बाँहों में 

 

ऊपर क्यों रुका है चाँद ,

उत्तर आ मेरी बाँहों में , 

कभी तो तू भी आजा ,

दिल की धड़कनों की चाहों में | 


माना गगन है घर तेरा ,

नीचे धरा की मैं वासी ,

शुरू से ही तू तो है ,

बसा मेरी निगाहों में | 


झिलमिलाते नन्हें तारे ,

चाँद हैं वो सब साथी तेरे ,

हैं यहाँ सभी साथी मेरे ,

धरा की पनाहों में | 


चाँद तू है बिंदी गगन की ,

धरा के हम फूल हैं ,

गगन में तू रूप भरता ,

धरा ने रखा हमें अपनी छाँवों में | 


चाँद तेरी चाँदनी का आँचल ,

आज भी फैला धरा पर ,

हम सब ही आए हैं ,

चमकीले आँचल की पनाहों में | 


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