Sunday, January 11, 2026

RAAH AASAAN BANAA LO ( KSHANIKAA )

 

                         राह आसान बना लो 

 

अपनी जिंदगी के कोरे कागज पर ,

अपने आप अपने कर्मों को लिखो दोस्तों ,

सुकर्म करते जाओ  और उसे , 

कागज पर लिखते जाओ   || 

 

अच्छे कर्म करेंगे , तभी तो ईश्वर भी  ,

हमें अपना आशीर्वाद प्रदान करेंगे  ,

और हमारी आगे की राह को सुगम बनाएँगे  ,

अपना प्यार हम पर बरसाएँगे   || 

 

जिंदगी की राह सुगम होगी ,  चलना आसान होगा ,

हम आराम से चलते जाएँगे ,और उसे पार कर जाएँगे ,

सुकर्मों से अपने जीवन को ,आसान बना लेंगे ,

तो राह आसान बना लो , राह आसान बना लो  || 

 

DIL KII BAATEN ( KSHANIKAA )

 

                              दिल की बातें 

 

सुनो अपने दिल की आवाज , सुंदर , प्यारी आवाज ,

सुनो अपने दिल की झंकार  , सुंदर , प्यारी झंकार  ,

जो बढ़ा देंगी  , जिंदगी की खुशियाँ   || 

 

दिल तो तुमसे , मीठी - मीठी बातें ही करेगा  ,

वो बातें जीवन भर , तुम्हें खुश रखेंगी  ,

तो हमेशा दिल से बातें करो ,और दिल की बातें सुनो  || 

 

जिंदगी बहुत खूबसूरत है दोस्तों , उसमें खुश रहो  ,

ये जहाँ बहुत सुंदर है दोस्तों , उसे सुंदर बना लो दोस्तों  ,

 तभी सुखमय जीवन बिताओगे  दोस्तों   || 

 

Friday, January 9, 2026

MANN KII UDAAN ( KSHANIKAA )

 

                  मन की उड़ान 

 

आसमान है इतना विशाल  , आँखें पूरा देख नहीं पातीं  ,

आसमान है इतना ऊँचा ,आँखें इतना ऊँचा देख नहीं पातीं  ,

पर मन की उड़ान है , इतनी ऊँची , 

इतनी विशाल , सब कुछ देख लेती  || 

 

 मन तो पूरे जग में घूम लेता  , ब्रह्मांड का चक्कर लगा लेता  ,

मन की इच्छा ,मन की शक्ति  , सब कुछ कर लेती दोस्तों  ,

तो मन की उड़ान को ,पूरी आजादी दे दो दोस्तों   || 

 

तभी तो कहावत है , " मन के हारे हार है ,मन के जीते जीत ",

तो मन को शक्तिशाली बनाए रखो , आजाद बनाए रखो  ,

तभी तो मन सब कुछ जीत पाएगा  ,

और  आप भी  खुश रह पाओगे दोस्तों   || 

 

Thursday, January 8, 2026

KARNN KII VYATHAA ( KSHANIKAA )

 

                          कर्ण की व्यथा 

 

क्यों छोड़ दिया तुमने मुझे  ,नदिया की धार पे   ?

क्या मैंने तुमसे कुछ माँगा था , अपने दो हाथों में  ?

जीवन भी तुमने दिया था  , सिर्फ अपनी मर्जी से ,

क्या मैंने वह जीवन भी तुमसे , माँगा था पुकार के   ??

 

बाकी पुत्रों को जन्म दिया  , पाल - पोस कर बड़ा किया  ,

क्या मैं नहीं था तुम्हारे , शरीर का अंश जो फेंक दिया  ?

मैं क्यों तुम्हें अपनी माँ पुकारूँ , अपनी जुबान से   ?

मेरी माता तो राधा है  , जिसने पाला अपने आँचल में  || 

 

राजकुमारों के द्वंद्व युद्ध में जब , मेरा अपमान हुआ  ,

तुमने तो तब भी मुँह फेर लिया , अपने ही अंश से  ,

तब तो वही राजकुमार आगे आया  , मेरे अपने पक्ष में ,

वो था बुरा तुम्हारे पुत्रों के लिए , मेरा तो वह दोस्त है   || 

 

तो क्यों आज मैं उसका हाथ छोड़ूँ , जो मेरा दोस्त है  ?

आज उसे मेरी  जरूरत है , अपने दोस्त की  ,

मैं जान देकर भी उसकी , मदद करूँगा ,मदद करूँगा ,

मैं राधेय था , राधेय हूँ  , राधेय ही रहूँगा   || 

 

 

Wednesday, January 7, 2026

CHAMKAAR ( CHANDRAMAA )

 

                            चमकार 

 

चाँद का घर है  , बादलों के पार दोस्तों  ,

चलो उड़ चलें हम भी  , बादलों के पार दोस्तों  ,

लाओ कहीं से दो पंख  , चाहे हों उधार दोस्तों    ||  

 

 पंख लगा कर  हम उड़ जाएँ ,  ऊँचे गगना  में  ,

चाँद पर पहुँच जाएँ , हम गगना  के अँगना में  ,

पहुँच कर चाँद के घर  , कर लें उससे आँखें चार दोस्तों   || 

 

चंदनिया भी मिलेगी वहाँ  , जो मुस्कान है चंदा की  ,

उससे हम करेंगे दोस्ती  , चंदा के उस घर में  ,

चमकाएँगे अपना जीवन , लेकर चंदनिया की चमकार दोस्तों   || 

 

Tuesday, January 6, 2026

AUM HII BRAHM ( AADHYAATMIK )

 

                       ॐ  ही  ब्रह्म 

 

ईश्वर का अस्तित्व है क्या  ?  कोई नहीं जानता   ,

देखा है क्या उसे किसी ने  ? कोई नहीं जानता  ,

अधिक लोग उसके अस्तित्व को मानते  ,

कुछ नहीं मानते  ,

क्या आप मानते हैं दोस्तों   ??

 

कुछ लोग पूजा - स्थल पर जाते हैं  , पूजा करते हैं  ,

मगर कुछ कहीं नहीं जाते , पूजा नहीं करते  ,

मगर ईश्वर के अस्तित्व को मानते हैं  ,

उसे याद करते हैं  ,

आप क्या करते हैं  दोस्तों   ??  

 

हम तो दोस्तों , इस ब्रह्मांड को ,

बनाने वाली और उसे चलाने वाली  ,

शक्ति को मानते हैं  , और उसे याद करते हैं  ,

नमन करते हैं  , शीश झुकाते हैं  ,

ॐ  शब्द का उच्चारण कर  ,

ॐ को ही ब्रह्म मानते हैं  ,

आप क्या मानते हैं  दोस्तों  , जवाब दो   ?? 

 

Monday, January 5, 2026

CHAMAKATII DAAMINII ( JALAD AA )

 

                            चमकती दामिनी 

 

सारी रात बदरी बरसती रही सखि री ,

साथ में दामिनी चमकती , कड़कती रही सखि री ,

पवन ने भी अपनी दौड़ लगा दी सखि री  ,

रात भर द्वार खड़कते रहे सखि री   || 

 

रात में हर शोर ने ,जगाया हमें कई बार  ,

नींद की रानी ने , वापस सुलाया हमें हर बार  ,

बदरी  भी रात के अँधियारे में   ,

पवन के संग , डोलती रही सखि री   || 

 

दामिनी की चमक ने दिखाया  ,

अँधेरे में भी रस्ता बदरी को  ,

बदरी ने भी हाथ थाम कर दामिनी का  ,

मनोरंजन कराया , धरा को सखि री   || 

 

चलो दोस्तों हम भी  , बदरी का हाथ थामें  ,

गगना के अँगना में खेलें  ,

दामिनी तुम दिखाओगी ना , रास्ता हमें भी  ? 

रात के अँधियारे में धरा के  , अनजान रास्ते सखि री   ||   

Sunday, January 4, 2026

SANGEET AUR GEET ( JIVAN )

 

                          संगीत और गीत 

 

संगीत के सुरों से , गीतों के बोलों को मिलाकर  ,

ये जहां गुनगुनाता  है , मुस्कुराता है दोस्तों  ,

तो तुम भी उन्हीं को गुनगुनाकर  ,

मुस्कुरा लो दोस्तों   || 

 

जहां का सारा संगीत ,

झरनों की कल - कल से आता है  ,

नदिया की छल - छल से आता है  ,

कोयल की कूक संगीत की जान है  ,

चिड़ियों की चहक संगीत की शान है  ,

तुम भी उसे सुन कर  , खिलखिला लो दोस्तों   || 

 

गीतों के प्यार भरे बोल  ,

मिल जाते हैं , जब सुरों से  ,

तो सारा जहां , उनसे  गूँज उठता है  ,

खिलखिला उठता है   || 

 

Saturday, January 3, 2026

PYAAS ( RATNAAKAR )

         

                             प्यास 

 

आज तो बदरा बरसे , पूरी रात सखि ,

रत्नाकर की प्यास बुझाई  ,

कहाँ से लाए इतना जल   ?

जिससे भर पाया पूरा रत्नाकर   || 

 

लहरें रत्नाकर की , खेल रही होंगी  ,

उछल - उछल कर खेल रही होंगी  ,

सबको ही पास बुला रही होंगी  ,

मुस्कानें सब में बाँट रही होंगी   || 

 

बदरा से इतना जल लेकर , 

रत्नाकर तुम आओ मेरे पास  ,

हम दोनों साथ मिल कर बैठेंगे  ,

मिल - जुल कर दिल की बात करेंगे   || 

 

तुम अपनी सुनाना और मेरी सुनना  ,

आपस में एक - दूजे की  ,

जिंदगी के बारे में जानेंगे  ,

और दोस्ती में डूब जाएँगे   || 

 

Friday, January 2, 2026

SACH - JHOOTH ( JIVAN )

 

                             सच - झूठ 

 

हम सच बोलते रहे तुम से ,

तुम झूठ बोलते रहे हम से  ,

सच और झूठ की यही राहें , मिलती रहीं आपस में  ,

तो बोलो तुम , ऐसा क्यों  हुआ  ?? 

 

ये सच और झूठ की राहें  , क्यों आपस में टकराईं  ?

क्यों ये राहें ,  अलग नहीं हुईं  ?

तो बोलो तुम  , ऐसा क्यों हुआ  ?? 

 

अगर ये राहें अलग हो गईं  ,

तो जीवन हमारा और तुम्हारा , 

सुंदर हो जाएगा दोस्तों  ,

कीमत कुछ शब्दों की तो होनी चाहिए  ,

मान अपने शब्दों का तो होना चाहिए  ,

सच का सम्मान  होना चाहिए दोस्तों    || 

 

Thursday, January 1, 2026

SHRUM - BINDU ( PAWAN )

 

                        श्रम - बिंदु 

 

श्रम - बिंदु  ---  मेहनत का पसीना ,

 

आज पवन मेरे घर आई सखि  ,

मेरे श्रम - बिंदुओं को , वह ले उड़ी सखि ,

प्यार से मेरे चेहरे को , सहला गई सखि , 

उड़ा - उड़ा कर मेरे  , गेसू बिखरा गई सखि   || 

 

गगना में उड़ते बदरा को  , दूर उड़ा गई सखि  ,

रवि किरणों को भी  , हर ओर फैला गई सखि  ,

धरा पर रश्मियाँ  , बिखरा गई सखि   || 

 

राहों के अँधियारों को  ,  चमका गई सखि  ,

हमारी साँसों को  , महका गई सखि  ,

ऐसी हमारी सहेली है  ,  ये पवन है सखि   ||