Sunday, March 21, 2021

KALPANA ( GEET ) PITA KE UDGAAR

 

           कल्पना    ( पिता के उदगार )

 

एक कल्पना प्यारी सी आई मेरे घर आज ,

दिन बड़ा सुहावना प्यारी तारीख है आज ,

दिल चाहता है नाचने को आज ,

कई युग के बाद एक कली आई मेरे घर आज | 

 

फूलों से भी नाजुक है वो ,

चाँद से भी खूबसूरत है वो ,

एक भीगी सी महक घर में छाई हुई है ,

मैं तो होश गँवा रहा हूँ इस महक में आज | 

 

कोई तो संभालो मुझको ,

मेरी भी उम्र लग जाए इसको ,

कभी ना मुरझाए मेरी छोटी सी कल्पना बेटी ,

कभी ना हो इसको कोई दुःख ,

भगवान इसको खुश रखना सदा | 

 

 

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