Tuesday, March 23, 2021

PARI AAI ( CHANDRAMA )

        

  चंद्रमा  ( परी आई )  भाग -- 7


एक परी आई मेरे आँगन में ,

एक कली खिली मेरे गुलशन में--- | 


बहार लौट आई घर फिर से ,

देखने उस कली की मुस्कानें ,

देख कर बार - बार उसको ,

मन मेरा लगता है गुनगुनाने --- | 

 

चाँद शर्माता है चेहरे से उसके ,

चाँदनी छुप के लौट जाती है ,

जब मेरी गुड़िया के चेहरे पर ,

एक खिलती सी हँसी आती है --- |

 

जिंदगी खुशियों से भर जाएगी ,

दामन में फूल होंगे सारे ,

जिधर भी कदम उठा देगी वो ,

उसके अनुकूल होंगे तारे --- | 

 

 


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