Wednesday, April 26, 2023

MUSKAATEEN ( JIVAN )

 

                          मुस्कातीं 


रिश्तों का भंडार अनूठा ,बँधता प्रेम की डोरी से ,

इत - उत डोले धीरे -धीरे ,टूटे ना ये कभी जोरी से | 


तुम भी जोड़ो ,मैं भी जोड़ूँ ,बाँधें इसे मजबूती से ,

हँसते -गाते जीवन बीते ,बँध जाए जो मजबूती से | 


रिश्ता उतना पावन है बंधु ,जितना पावन प्यार है ,

जैसे फूल मुस्काते खूब ,आती जब बहार है | 


फूलों जैसी सुंदरता भी ,देख तितलियाँ मुस्कातीं ,

उन पर बैठ -बैठ के ,गीत सुनातीं ,उड़ जातीं | 


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