Friday, April 28, 2023

JAADUI SHAAM ( JIVAN )

 

                              जादुई शाम 


ए - मेरे हमसफर ,चल मेरे संग में ,इस नयी राह में ,

पार करने ये लंबा सफर ,इस जादुई शाम में | 


ढलते रवि की ये जादुई किरणें ,शाम को हसीन बनाती हैं ,

ऐसे में ये किरणें ,तुझको - मुजादू  जादू  झको बुलाती हैं | 


रंग सुनहरी जो बिखरा है ,धरा की बन गई  है ,

ऐसे में तो ये धरा ,सपनीली हो गई है | 


ऐसे में हम -तुम जो चले ,शाम का जादू और निखरेगा ,

रवि -किरणों का सोना भी ,कुछ और बिखरेगा ,

आ हम ही समेट लें ,इस सारे जादू को ,इस सारे जादू को | 


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