Monday, May 1, 2023

MEETHEE MUSKAANEN ( RATNAAKAR )

 

                             मीठी मुस्कानें 


सागर जो उम्मीद का हो तो ,

खुशियों का मेला बन जाए ,

सागर ना उम्मीदी का हो तो ,

उदासियों का रेला बन जाए | 


चुन लो बंधु ,तुम्हें चाहिए कौन सा सागर ? 

खुशियों का मेला या उदासियों का रेला ? 


मुस्कानों के मोती चुन कर ,

बाँटो सभी में ,मीठी -मीठी मुस्कानें ,

खुशियाँ मिलेंगी ,सभी को  तुम से ,

तो बढ़ेंगी ,चहुँ ओर तुम्हारी पहचानें | 


दूजों से तुमको भी बंधु ,मिल जाएँगी  ,

मीठी - मीठी मुस्कानें ,

घिरे रहोगे मुस्कानों से तुम ,

तो सागर होगा मीठा - मीठा और मीठा |  


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