Wednesday, May 17, 2023

UMARIYAA ( JIVAN )

 

                          उमरिया 


पल -पल घटती जाय उमरिया ,

क्यों दशकों के प्लान बनाय रे बंधु ,

लेकर आया जितना समय तू जग में ,

बढ़ता नहीं वह  घटता  ही है बंधु | 


बढ़ती है तो ,वो है तृष्णा ,

तेरी इच्छा ,तेरी आशा ,तेरी उम्मीद ,

सबको बंद करदे तू डिब्बे में ,

तभी मनेगी रोज ही ईद | 


चाहों की गठरी जो तेरी ,

जैसे तू चाहे ,कर्म बाँध ले ,

जब जाएगा वापस तू जग से ,

गिनती होगी तब कर्मों की ,

और जो होगा विधि की इच्छा , 

विधि की इच्छा ,विधि की इच्छा |





No comments:

Post a Comment