Tuesday, May 30, 2023

JINDAGEE KE SWARNAAKSHAR ( KSHANIKA )

 

 

                  जिंदगी के स्वर्णाक्षर 


हर दिन खुलता जाता है ,जिंदगी का एक पन्ना ,

हर  पल गुजरते ही पढ़ पाते हैं हम ,

क्या लिखा था एक लाइन में ? 

पूरे  दिन के बीतने पर ही ,

पढ़ पाते हैं वह पूरा पन्ना | 


क्या हम कर पाए ? क्या नहीं कर पाए ? 

दिन बीत जाता है तभी ,यह सब याद आए ,

चलते ,रुकते ,यूँ ही तो दिन बीता जाए ,

कर्तव्य पथ पर हम ,कितना आगे बढ़ पाए ? 


जिंदगी में बहुत से ,दोस्त हमारे साथ रहते ,

जिनमें से कुछ हमारी तारीफ़ करते ,

वो ,जो हमारी उन्नति से खुश होते ,

और कुछ हमारी गलतियाँ बताते ,

वो ,जो हमारी उन्नति में सहायता करते ,

दोनों तरह के ही तो ,दोस्त सच्चे हैं हमारे ,

जो हमारी जिंदगी की ,किताब में लिखे ,

स्वर्णाक्षर हैं ,स्वर्णाक्षर हैं ,स्वर्णाक्षर हैं | 


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