Sunday, May 28, 2023

DAANVEER KARNN ( KSHANIKA )

 

                     दानवीर कर्ण 


भारतीय हूँ मैं ,गर्व है मुझे ,

इस माटी में जन्म ,मिला है मुझे ,

जीवन इस हवा में ,खिलता रहा हरदम ,

स्वरों में जैसे ,गूँज गया हो स्वर पंचम | 


इसी भारत में ,लिखा गया महाकाव्य ,

नाम जिसको मिला था महाभारत ,

जिसमें एक चरित्र था कर्ण ,

माता से त्यागा हुआ , पुत्र था वो कर्ण | 

 

गरीबी में पला बढ़ा ,ज्ञान का था धनी ,

सभी शिक्षा सीखने में ,वह था प्रबल ,

मगर सभी समझते थे ,उसे दुर्बल ,

जब कि वह था ,सबसे ही सुबल | 

 

भरी सभा में द्रौपदी ने ,सूतपुत्र कहा ,

ना ज्ञान उसका जाना ,ना मान उसका किया ,

कौरवों की सभा में भी ,अपमान जब हुआ ,

दुर्योधन  ने ही उसे ,तब राजपद दिया | 

 

युद्ध में जब पांडवों की ,हार होने लगी ,

त्यागने वाली माता ने ,रिश्ते की दुहाई दी ,

तब क्या यह उचित था ? उसके मन को भरमाना ,

क्या वही माता ,लौटा सकती थी उसका मान ? 

 

छल तो इंद्र ने भी किया ,कर्ण के साथ ,

कवच ,कुंडल माँग लिए ,ब्राह्मण बन के ,

इंद्र ने यह सब किया ,पांडवों से मिल के ,

जिससे कर्ण ना उभरे ,बहुत शक्तिशाली बन के | 

 

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