Wednesday, April 5, 2023

SANDESAA SAAGAR KAA ( RATNAAKAR )

 

                      संदेसा सागर का 


सागर का संदेसा आया ,लहरें लेकर आईं हैं ,

उसने कहलाया है ,"घर से बाहरनिकल सहेली ,

मैं आया हूँ तेरे घर ,अपना प्यार लेकर के सहेली | " 


" लहरें मेरी मचल -मचल कर ,आईं हैं साथ मेरे ,

वो भी दोस्त मेरी हैं ,देख रहीं हैं तेरा घर ,

तू ,मैं और मेरी लहरें ,मिल के गप्पें मारेंगे सहेली | " 

 

" मेरा आँगन बहुत बड़ा है ,पानी - पानी भरा पड़ा है ,

रत्नों का भंडार जड़ा है ,जीवों से वह भरा पड़ा है ,

ऐसे ही बाहर से देखकर ,तुझे लगेगी बड़ी पहेली | "

 

" लहरें सब- कुछ जानती हैं ,तू उनसे ही बात करे तो ,

सब-कुछ समझा देंगी तुझको ,मेरे घर -अँगना के बारे ,

तू भी सब -कुछ समझ जाएगी ,सुलझा लेगी पूरी पहेली ,

क्योंकि हम दोनों तो हैं ,सखा -सहेली ,सखा -सहेली | " 

 

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