Thursday, August 17, 2023

DO CUP CHAAY ( KSHANIKA )

 

                                  दो कप चाय 


सुबह - सुबह जब नींद खुली ,और मुस्कान जगी ,

गर्मागर्म चाय की तलब लगी ,तैयार की दो कप चाय ,

चाय तो थी ,एककप अपने लिए ,दूसरा कप उनके लिए | 


खिड़की के पास बैठकर बाहर को झाँका ,

तो मौसम खुशगवार था रवि सामने मुस्कुरा रहा था ,

चाय तो थी ,एक कप अपने लिए ,दूसरा कप उनके लिए | 


चाय का सिप लिया ,स्वाद आया कड़क चाय का ,

धीरे - धीरे चाय पीते जा रहे थे ,

दोनों ही मानो चाय में डूबे जा रहे थे ,

चाय तो थी ,एक कप अपने लिए ,दूसरा कप उनके लिए | 


चलो जी ,चाय तो ख़त्म होने को आई ,

रवि जी बोले ,चाय ख़त्म ,काम पर लग जाओ ,

चाय तो थी ,एक कप अपने लिए ,दूसरा कप उनके लिए | 


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