Wednesday, February 14, 2024

LEKHNEE NEY ( CHHOTI KAVITAAEN )

 

                       लेखनी ने 


लेखनी ने मेरी ,ना जाने क्या लिखा ?

तुमने ना जाने ,उसको क्या पढ़ा ? 

पढ़ने के बाद ,उसका अर्थ क्या समझा ? 

समझ कर अर्थ ,क्या उसका अनर्थ बनाया ? 


भाव मेरे थे प्यार के ,मगर तुमने उसे नहीं समझा ,

गुस्से और नफरत में बदल दिया ,

काश तुम समझ पाते ,मेरे सही भावों को || 


भावों को मेरे ,तुमने पानी में बहा दिया ,

कागज की कश्ती जैसे ,भाव ना तैरे पानी में ,

वो तो सभी मानो ,डूब गए पानी में ,

काश कोई तो समझता ,कोई तो बूझता ,

क्या कहना चाहा है ? मेरी लेखनी ने ,मेरी लेखनी ने || 


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