Sunday, March 3, 2024

CHAMATKAAR ( CHANDRAMA )

 

                          चमत्कार  


चाँद तू चहुँ ओर घूमे ,चाँदनी के साथ -साथझूमें ,

रात के अँधियारे में ,

तुम दोनों की मुस्कानें ही झूमें || 


धरा पे उजियारा तुम से छाए ,जीवन उसमें ही रंग जाए ,

अंतर्मन भी उसमें गुनगुनाए ,

मानो कोई मीठा संगीत गूँजे || 


रातके अँधियारे में परछाइयाँ ,नहीं मिलती हैं दोस्तों ,

मगर चाँदनी के उजियारे में ,

परछाइयाँ उजागर होती हैं दोस्तों || 


ये सब चाँद और ,चाँदनी का ही ,

चमत्कार है दोस्तों ,चमत्कार है दोस्तों ,

उनका प्यार है दोस्तों || 


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