Sunday, March 10, 2024

WAQT ( KSHANIKAA )

 

                             वक्त 


वक्त सदा बहता जाए ,नदिया जैसा ,

वक्त कहाँ रुके रुकाए ? नदिया जैसा ?

वक्त की सदा ,सुन लो पुकार ,

वक्त की सुन लो पुकार ,धड़कन जैसी || 


वक्त कैसा भी  हो ? अच्छा या बुरा ,

बीतता चला जाता है ,अच्छा या बुरा ,

कोशिश ना करो ,वक्त को रोकने की ,

बीतने दो ,चलने दो ,बहने दो ,उड़ने दो || 


क्या कहा आपने ? घड़ी को बंद कर दो ,

इससे वक्त की नाप ,पता नहीं चलेगी ,

पर बंधु वक्त तो ,अपनी चाल से चलेगा ,

रुकेगा नहीं ,रुकेगा नहीं , रुकेगा नहीं || 


वक्त तो तेजी से ,चलता जाता है ,

आज बदल कर ,कल बन जाता है ,

कभी ना सोचो ,वक्त की चाल के बारे में ,

वक्त भी बहते हुए ,अपना हर रंग दिखाएगा || 


No comments:

Post a Comment