Monday, February 6, 2023

RAAT MEIN ( CHANDRAMA )

 

                               रात में 


सखि री ! चाँद आधा ही उतरा रात में ,

खिड़की मेरी खुली थी ,

वो आया उसमें से अंदर ,

चाँदनी को लेकर वो आया साथ में | 


चाँदनी ने जो चमकाया मेरे कमरे को ,

नींद खुल गई थी मेरी भी ,

देखा जगमगाता कमरा अपना ,

और चाँद ,चाँदनी थे साथ में | 


तभी झिलमिलाते तारे भी ,अंदर आए ,

उन्होंने कमरे में उधम मचाया ,

मेरे बच्चे भी जागे ,उठ बैठे ,

खेले वो खूब ,तारों के साथ में | 


चंद्रमा चाहे आधा था ,

मगर चाँदनी बहुत चमकीली थी ,

मन किया कि सारी चाँदनी ,

भर लूँ मैं पूरे आँचल में | 


मगर चाँदनी तो ऐसी थी ,

निकल गई छन्न से ,आँचल से ,

मगर आँखों को मेरी चमका गई ,

आज भी वही चमक है ,मेरी आँखों के साथ में | 


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