Wednesday, February 1, 2023

UDAAN HAI NAHIN ( JIVAN )

 

                       उड़ान है नहीं 


उम्र बीत गई दोस्तों ,घरोंदा बनाने में ,

बनाने में और ,सपनों से सजाने में ,

भूल गए हम तो ,कि पंख भी मिले हैं ,

उड़ानें भी भरी जा सकती हैं ,आसमान में | 


बच्चों के घरोंदे ,बन गए जब ,

रह गए ,अकेले हम जब ,

तब पंख याद आए ,उड़ानें याद आईं ,

मगर तब ना थी ताकत ,उड़ानें भर ना पाईं | 


घरोंदा भी हम तो ,नहीं संभाल पाए ,

उड़ानें तो दोस्तों ,हम शुरु ही ना कर पाए ,

खाली हैं हाथ अपने ,बस कुछ हैं सपने ,

और सपनों की हैं ,बची हुई यादें | 


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