Thursday, April 8, 2021

EK AAS ( GEET )

 

                 एक आस 

 

हर पल गुजरता जाता है ,

एक आस दामन में लिए ,मैं जीती जाती हूँ ,

ना पल कोई लौटा ,ना आस हुई पूरी ,

ये दिनबिट चले हैं ,जिंदगी पूरी हुई जाती है | 

 

मौसम के बदलने पर ,आस का धागा टूटता है ,

जुड़ जाता है ,वापस मगर ,

उसमें एक गाँठ सी पड़ जाती है ,

ना फूल ,ना कोई मोती ,

कुछ नहीं पिर सकता ,

गाँठ पर ही रुक जाता है ,

कैसे हार बनाऊँ प्रियतम ? 

कैसे तुम्हें पहनाऊँ प्रियतम ? 

 

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