Monday, April 26, 2021

KHANAK GAIN ( JALAD AA )

 

       खनक गईं   

 

साजन दूर बसे फिर भी ये ,

बैरन चूड़ियाँ खनक गईं ,

चाहा सपनों में खो जाऊँ मैं पर ,

बैरन चूड़ियाँ खनक गईं | 

 

याद आई है सावन की ,

परदेस गए उस साजन की ,

मन यादों में खोया था पर ये ,

बैरन चूड़ियाँ खनक गईं | 

 

सारी रतिया बरसात हुई ,

प्रीतम से थीं दो बात हुईं ,

हम प्यार में डूब गए थे पर ये ,

बैरन चूड़ियाँ खनक गईं | 

 

सुंदर सपना है आने का ,

साजन को यहाँ बुलाने का ,

शायद वो भी आ जाते पर ये ,

बैरन चूड़ियाँ खनक गईं | 

   

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