Friday, December 23, 2022

BHORR ( GEET )

 

                भोर 


नींद में डूबे तो ,सपनों की दुनिया ,

जिसका कोई ओर ना छोर ,

मन - मयूर उसमें उड़े ,

खिलखिलाता हुआ चहुँ ओर | 


अनजानी सी वह दुनिया ,

फैली है बिन डोर चहुँ ओर ,

अंतर्मन उड़ता जाता है ,

जैसे बँधी हो कोई अदृश्य डोर | 


सपने खट्टे - मीठे मिलते ,

कुछ मन को याद हैं रहते ,

कुछ को भूल जाते हैं हम ,

कुछ को याद कर नाचे मन का मोर | 


उस दुनिया में नई जगह हैं ,

कुछ जाने ,कुछ अनजाने चेहरे,

घूम - घूम कर ,देख -देख कर ,

आ जाती है सुंदर सी भोर | 

 

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