Wednesday, December 7, 2022

MANN ( JALAD AA )

 

               

   मन  (  जलद आ )


खुशियों में मन बावरा ,झूमे ,नाचे ,गाए  ,

मगर देख दुःख की छाया ,मुरझाए ,अकुलाए | 


बदरा जैसा मन मेरा ,पवन संग उड़ जाए ,

चमके जब -जब दामिनी ,जोर से शोर मचाए | 

 

मन की पीड़ा मन ही जाने ,ना जाने दुनिया सारी ,

तेरा मन या मेरा  मन हो ,क्यों पीड़ा से हो भारी ? 


मन की पीड़ा समझे बदरा ,मन जब अश्रु बहाए ,

बदरा का भी दिल पिघले ,छम -छम नीर बहाए | 


बरखा बरसे धरा तृप्त ,मन भी ठंडक पाए ,

तृप्ति का आभास ही ,मन को सुखी बनाए | 


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