Thursday, December 15, 2022

DAUDII JAATI ( GEET )

      

           दौड़ी जाती 


चली है नदिया बलखाती ,संगीत सुनाती ,इठलाती ,

तेज धार का रूप लिए ,प्यार सभी से जतलाती | 


सभी को प्यार से दे आवाज़ ,पास बुलाकर प्यार जताए ,

अपने जल से सभी को वह ,झर -झर कर भिगो ही जाती | 


धरा तेज है नदिया की ,साथ नहीं हम चल सकते ,

दौड़ -दौड़ कर भी हम तो पीछे ,वो आगे ही दौड़ी जाती | 


पकड़ नापाएँ उसको हम ,वो तो सरपट दौड़ लगाए ,

ऐसा हमें तो लगता है ,वो ओलिम्पिक में गोल्ड जिताती | 

 

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