Tuesday, January 17, 2023

RAAT BANAAM DIN ( JIVAN )

 

                        रात बनाम दिन 


नींद की गहराइयों में ,डूब गए जब हम ,

रातों की लंबाई ,बहुत अच्छी लगने लगी ,

ख्वाबों की मुस्कुराहटें ,जब बढ़ गईं  तो ,

रातों की तनहाइयाँ , बहुत अच्छी लगने लगीं | 


ख्वाबों को पूरा करने की ,हसरतों ने जब जन्म लिया ,

दिन की लंबाई भी ,बहुत कम सी लगने लगी ,

ख्वाब जब धीरे - धीरे ,पूरे होने लगे ,

दिन की उदासियाँ भी ,मुस्कुराहटों में बदलने लगीं | 


इन्हीं रात और दिन ,के चलने से तो दोस्तों ,

जिंदगी की राहें ,चलती जाती हैं ,

इन्हीं पहियों द्वारा तो ,जिंदगी की गाड़ी ,

सभी तरह के रास्तों पर ,दौड़ी ही तो चली जाती है | 


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