Sunday, January 22, 2023

UMMEEDEN ( KSHANIKA )

 

                          उम्मीदें  


उम्मीदें बनाए रखो ,तभी मिलेगा भोर का उजाला ,

उसी उजाले में मुस्कान खिलीं रहेंगी ,

उसी से सजी रहेगी ,खुशियों की माला | 


उम्मीदों की चाभी से ही ,खुलेगा सुखों का ताला ,

सुख में डूबकर ही तो ,

चैन की नींद का होगा बोलबाला | 


उम्मीदों के रंगों से ही ,इंद्रधनुष छाएगा ,

जिंदगी का आसमान ,रंगीन हो जाएगा | 


उम्मीदें दूसरों से ना बनाना कभी ,

टूट -टूट कर बिखर जाएँगी ,

उम्मीदें अपने दिल में जगाए रखो ,

तभी तो आत्मा खिलखिलाएगी | 


उम्मीदों की ज्योति ही ,

हमारे मन - मंदिर में जगमगाएगी ,

तभी तो दुनिया सारी ,

सुंदर से सुंदरतम बन जाएगी | 


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