Thursday, April 18, 2024

KHAJAANAA ( KSHANIKAA )

 

                                   खजाना 


एक सुरमई शाम में ,चाँदनी हुई अनबनी ,

खजाना जो यादों में था ,खो गया हवाओं में ,

कैसे ढूँढे कोई उसे ? असंभव सा ये काम था || 


उसे ढूँढेंगे हम ,अपने अंतर्मन में ,

मिलेगा खजाना हमें ,अपने ही अंतर्मन में ,

और अनबनी चाँदनी भर जाएगी ,अपने अंतर्मन में || 


राहें अजनबी हों ,या जानी - पहचानी ,

सभी तो चलती जाती हैं ,अपने ही आस -पास ,

उन्हीं राहों में ढूँढ लेते हैं ,अपना खजाना ,

यादों का खजाना ,यादों का खजाना || 


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