Sunday, May 2, 2021

DAAYARI MERI SAKHI ( 03/05/2021 )

 

 

 डायरी मेरी सखी  ( 03 /05 2021 ) 

 

सुनो सखि तुमको आज मैं ,एक पुरानी बात बताऊँ ,

कॉलेज में पढ़ते दिनों की ,एक मजे की बात बताऊँ | 

 

मेरठ शहर में लगता था दोस्तों ,नौचंदी का मेला ,

हमने बचपन से ही दोस्तों ,देखा था वो मेला | 

 

गर्मी शुरू हो रही थी ,शुरू हुआ जब मेला ,

हम तो दोस्तों जा पहुँचे ,देखने को वो मेला | 

 

वहाँ पहुँच कर झूलों में बैठे ,घूमें पूरा मेला ,

घूम -घूम कर पूरा मेला ,सबका पेट भी बोला | 

 

 खाने की जब बात सुझाई ,सब ने अपना मुँह खोला ,

हम को कुल्फी पसंद थी दोस्तों ,हमने भी मुँह खोला | 

 

सब तैयार हुए कुल्फी को ,ऑर्डर दिया गया कुल्फी का ,

कुल्फी खाने को दोस्तों ,आया कुल्फी का रेला | 

 

सबने खाना शुरू किया ,स्वाद ले लेकर ,

एक के बाद एक कुल्फी ,आई और खाई लेकर | 

 

सबने ही कुल्फियों का रेला ,अपने उदर उतारा ,

ज्यादा कुल्फी खाने के कारण ,दाँतों ने काँप पुकारा | 

 

अब बीएस करो कहानी कुल्फी ,और ना खा पाऊँगा ,

कुल्फी ने भी उदर में जाकर ,शरीर को कँपकँपाया | 

 

सभी ने बीएस किया क्योंकि दोस्तों ,

सभी को लगी थी सर्दी ,सभी काँप रहे थे , 

सर्दी से भई सर्दी से | 

फिर मिलेंगे सखि ,जय हिन्द | 


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