Tuesday, May 11, 2021

LAGAA EISA ( GEET )

 

               लगा ऐसा 

 

रात के आलम में ,ख़ामोशी के माहौल में , 

एक स्वर ,उभरा अचानक ,

पाया की अपनी ही ,चूड़ियाँ खनक गईं | 


लगा ऐसा कि जैसे तुमने ,चूड़ियों को छेड़ा था ,

चमकते सूरज की ,फैली धूप में एकाएक ,

कहीं से अंधकार छा गया,

लगा आकाश पर बदली छा गई | 

 

मगर ये तो मेरी जुल्फें हैं ,लगा ऐसा कि जैसे ,

तुमने ,हाँ ! तुमने ही ,जुल्फों को बिखराया | 

 

तभी आत्मा में कोई स्वर उभरा ,

लगा ऐसा कि जैसे ,तुमने मुझे पुकारा ,

सुनकर पुकार साजन की ,

समझी कि तुम हो आए | 


पलकें जो मैंने खोलीं ,खुद को अकेला पाया ,

जाना ये ख्वाब था सब ,तुम नहीं हो अब आए | 


 



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