Monday, May 31, 2021

BARASA SAVAN ( JALAD AA )

 

जलद  आ   ( बरसा सावन )


हर साल आया सावन ,भीग गया तन ,

इससे पहले क्यों नहीं ,भीगा मेरा मन ? 


हर साल बरखा बरसी ,हर साल छायी बदली ,

इन सबसे पहले ही मैं ,क्यों नहीं मचली ? 


बिजली चमकती थी ,बादल गरजते थे ,

क्यों नहीं मेरे नयन ,पहले से सरसते थे ? 


इन सबका एक उत्तर ,इन सबका एक कारण ,

इससे पहले नहीं कभी ,मिले मुझे साजन | 


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