Saturday, January 1, 2022

BANDHU MERE ( JIVAN )

 

 

                                बंधु  मेरे

 

समय दिया ऊपर वाले ने ,बीत चला है काफी बंधु ,

बाकि समय बचा जो है ,खर्च करो खुश हो कर बंधु | 

 

जितना जीवन है आगे ,मुस्कान बिखेरो उसमें बंधु ,

दोस्त बना लो ,मित्र बना लो ,सखि ,सहेली हैं सब बंधु | 


प्यार ,मोहब्बत जीने की ,राह को आसां करते हैं ,

उन्हीं राहों पे चल कर के ,अपना प्यार बढ़ाओ बंधु | 


फूल मोहब्बत के खिल जाएँ ,इस पूरी दुनिया में ,

ऐसे ही फूल मोहब्बत के ,तुम भी तो खिलाओ बंधु | 


कल जब ये सब फूल खिलेंगे ,सारी दुनिया महकेगी ,

उस सारी खुश्बु में ही ,तुम लथपथ हो जाओ बंधु | 


याद करे ये दुनिया तुमको ,ऐसी खुश्बु फैलाओ तुम ,

अपने साथ -साथ दूसरों का भी ,जीवन सुखी बनाओ बंधु | 


कर जाओ ऐसा काम सखे ,ठोकें सभी सलाम सखे ,

तुम गर्व से सिर ऊँचा कर जाओ ,मुस्कानें खूब दे जाओ सखे | 


ये जिंदगी की शाम है ,इसे हसीन कर लो बंधु ,

तपती दुपहरी तो बीत गई है ,अब तो बयार की शाम है बंधु | 


पूरा जीवन संघर्ष किया है ,अब हल्के - फुल्के काम करो ,

जो कुछ जीवन में ना कर पाए ,उन शौक को पूरा करो बंधु | 


देखो फिर दिल भी खिल जाएगा ,मुस्कान भी अपनी खिल जाएगी ,

उस खिलन से जीवन भी ,महक जाएगा अपना बंधु | 


जीवन की इन मुस्कानों में ही ,जीवन का सत्य छिपा है बंधु ,

जीवन के संघर्षों में ही तो ,कर्म का फल भी छिपा है बंधु | 


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