Monday, January 10, 2022

NAACH HAMAARA ( JIVAN )

 

                             नाच  हमारा 

 

समय लगेगा कितना बंधु ?बहने में इस धारा को ,

कब बरसेंगे बादल रिमझिम ?देंगे ठंडी फुहारों को | 

 

कब चमकेगी चमक दामिनी ?भर देगी उजालों को ,

कब आएगी बयार की ठंडक ?तपती सी इन राहों को | 

 

हर पल बीतेगा जीवन में ,धीरे -धीरे हर कल जाता ,

चलते रहते घड़ी के काँटे,हर पल मुस्कानों में ढल जाता | 

 

तू भी राही चलते रहना ,रुकना नहीं एक पल भी तू ,

तू जो रुका तो दुनिया रुकेगी,फूलों की मुस्कान रुकेगी | 

 

तूने बिताए अनगिन पल ,पलों से बीते अनगिन बरस ,

आगे भी हैं अनगिन पल,उनसे भी बनेंगे अनगिन बरस | 

 

जाग के सब कुछ देखना है,जीवन की इस बगिया को ,

दो पल के लिए भी ,वक्त ना यूँ ही बिताना है | 

 

जीवन बगिया खिल जाएगी,रंग खिलेगा फूलों का ,

खुश्बु महकाएगी अँगना,द्वार खुलेगा खुशियों का | 

 

 सोचो कल  जब यह सब होगा,खुशियों में नाचेंगे हम ,

जीवन के इस रूप में ढल के,खुशियों में नाचेंगे हम | 


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