Wednesday, January 5, 2022

BHAAL GAGAN KA ( KSHANIKA )

 

            भाल गगन का 

 

हुआ सूर्यास्त ,शाम का धुँधलका ,

पंछी चल दिए ,अपने नीड़ की ओर ,

उतर आया धरा पर ,रात का अँधेरा ,

चमके जगमग तारे ,गगन के भाल पर | 

 

दिन भर के काम से ,थके -हारे प्राणी ,

करने लगे आराम ,अपने धाम पर ,

आराम के बाद ,जागे प्राणी ,

सुबह हुई ,छायी लाली ,गगन के भाल पर | 

 

सूर्य मुस्कुराया ,जग में उजाला छाया ,

जीवन भी जगमगाया ,पंछी ने गीत गाया ,

सब जीव लगे काम पर ,आलस सभी का भागा ,

दिया कर्म तब दिखाई ,गगन के भाल पर | 

 

सूर्य का रथ चल दिया ,पौधे भी मुस्कुराए ,

फूलों के रंग देखकर ,तितलियों ने पर फैलाए ,

बच्चों की टोली ने भी ,शोर सा मचाया ,

संगीत बज उठा तब ,गगन के भाल पर | 

 

नव दिवस आता देखकर ,हर कोई मुस्कुराया ,

धीरे से समय ने भी ,अपना पग बढ़ाया ,

ऐसे ही धीरे - धीरे ,नव -वर्ष भी है आया ,

बधाईयों का संदेश भी ,चमका गगन के भाल पर |

 

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