Monday, February 17, 2025

BAAT ( KSHANIKAA )

 

                             बात 


बात ,बात की चली है यारों ,

बात ध्यान से सुनना तुम ,

बातों में से बात है निकली ,

इसको ध्यान से गुनना तुम   || 

 

बात से जब निकलती है बात ,

तो दूर तक चली जाती है बात ,

तो ऐसे निकलती बात को ,

देकर ध्यान समझना तुम  || 

 

बातों का सिलसिला जब चलता है ,

तो दिल तक बात पहुँचती है ,

तुम भी तो मेरी बातों को ,

अपने दिल तक पहुँचाना तुम  || 

 

अपने दिल के बाहर ही यारों ,

रोकना नहीं इन बातों  को तुम ,

खोलना अपने दिल के दरवाजों को ,

मेरी सारी बातें अपने दिल में पहुँचाना तुम ,

 समझ गए ना यारों  || 

 

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