Sunday, February 23, 2025

JHOOLE MELE KE ( KSHANIKAA )

 

                                झूले मेले के 


मेले में ऊँचे झूले में , कभी बैठे हो दोस्तों  ?

वह झूला नीचे आता है , फिर  ऊपर जाता  है ,

ऐसे ही झूला घूमता जाता है दोस्तों  || 

 

जब ऊपर जाता है , दूर तक मेला दिखता है ,

नीचे आते हुए ,हवा का तेज झोंका मिलता है ,

ऐसे ही झूला घूमता जाता है दोस्तों  || 

 

नीचे आते हुए ,ऊपर जाते हुए ,

दिल की धड़कनें ,बदलती जाती हैं ,

कभी तेज होती हैं ,कभी धीमे होती हैं  ,

ऐसे ही धड़कनों की ,गति बदलती जाती है दोस्तों  || 

 

जिंदगी के रास्तों में भी , झूले के समान ,

उतार - चढ़ाव आते हैं दोस्तों  ,

ये उतार - चढ़ाव ही ,जीवन में बदलाव लाते  हैं  ,

उन्हीं उतार - चढ़ाव से ,जीवन में ,

सभी भाव भी बदलते हैं दोस्तों  || 

 

उन्हीं भावों से जीवन में ,चमकने वाले ,

सभी इंद्रधनुष ,जीवन में रंग और ,

खुशियों भर जाते हैं ,साथ ही ,

होठों पर मुस्कानें ,खिला जाते हैं दोस्तों  || 

 

 

 

 

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