नीड़
जग में आते ही मिलते हैं , माता - पिता ,
कुछ नाते -रिश्ते भी मिलते हैं ,बोनस में ,
दादा -दादी ,नाना -नानी भी मिलते हैं ,
बाकि सब कुछ को मिलते हैं ,कुछ को नहीं ||
कुछ वर्षों बाद ,दोस्तों का साथ मिलता है ,
खेलों का स्वाद तब मिलता है ,
गुरु -जन आते हैं जीवन में ,जो ज्ञान हमें देते हैं ,
कुछ ऐसे भी मिल जाते हैं , जो जग का चलन सिखाते हैं ||
समय बीतता जाता है ,परिवार भी बढ़ जाता है ,
धीरे -धीरे फिर साथ भी ,छूटने लगता है ,
बुजुर्गों का हाथ छूटता है जब ,संसार सुना लगने लगता है तब ||
लेते हैं विदाई माता -पिता ,कुछ रिश्ते भी खत्म हो जाते हैं ,
धीरे - धीरे कुछ दोस्त गए ,आती है बारी अपनी भी ,
जग तो है ऐसी रेलगाड़ी ,सवार होते रहते सभी ,
फिर धीरे - धीरे ,एक -एक कर ,उतरते रहते सभी ||
तो क्या मोह ? क्या माया ? क्यों किसी से दिल लगाया ?
इस संसार में जो नीड़ था बसाया ,
एक दिन ऊपर वाले ने उसको खाली कराया ||
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