बतिया लो
वक्त ने आज मुझसे मुलाकात की दोस्तों ,
कहा आज दो घड़ी बतिया लो मुझसे ,
मैं चला जाऊँगा तो फिर नहीं आऊँगा दोस्तों ||
मैं कहीं भी रुक नहीं सकता हूँ दोस्तों ,
पता नहीं ,फिर जब मिलूँगा तो क्या हो ?
पता नहीं ,उस समय मैं तुम्हें हँसाऊँगा या रुलाऊँगा ?
इसीलिए आज ही तुम बतिया लो दोस्तों ||
आज तो हम दोनों के ,होठों पर मुस्कानें हैं ,
मीठे गीत हैं ,मीठे बोलों के तराने हैं ,
तो आज ही तुम मुझसे ,बतिया लो दोस्तों ||
सभी की सोच बदलती जाती है ,
सभी की जिंदगी ,प्यार में डूबती चली जाती है ,
तो आज ही तुम मुझसे बतिया लो दोस्तों ||
इन्हीं मुस्कानों को ,होठों पे सजाए रखो ,
दिल में प्यार को ,बसाए रखो दोस्तों ,
ये कहते हुए वक्त ने , फिर से बोला ,
तो आज ही तुम मुझसे ,बतिया लो दोस्तों ||
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